Oops! It appears that you have disabled your Javascript. In order for you to see this page as it is meant to appear, we ask that you please re-enable your Javascript!

भारत के प्रमुख पठार

भारत के प्रमुख पठार

भारत का प्रायद्वीपीय पठार एक मेज की आकृति वाला स्थल है जो पुराने क्रिस्टलीयए आग्नेय तथा रूपांतरित शैलों से बना है। यह गोंडवाना भूमि के टूटने एवं अपवाह के कारण बना था तथा यही कारण है कि यह प्राचीनतम भूभाग का एक हिस्सा है। इस पठारी भाग में चौड़ी तथा छिछली घाटियाँ एवं गोलाकार पहाड़ियाँ हैं। इस पठार के दो मुख्य भाग हैं-

  • मध्य उच्चभूमि
  • दक्कन का पठार
भारत के प्रमुख पठार
भारत के प्रमुख पठार

मध्य उच्चभूमि

नर्मदा नदी के उत्तर में प्रायद्वीपीय पठार का वह भाग जो कि मालवा के पठार के अधिकतर भागों पर फैला है उसे मध्य उच्चभूमि के नाम से जाना जाता है। विंध्य शृंखला दक्षिण में मध्य उच्चभूमि तथा उत्तर-पश्चिम में अरावली से घिरी है। पश्चिम में यह धीरे-धीरे राजस्थान के बलुई तथा पथरीले मरुस्थल से मिल जाता है। इस क्षेत्र में बहने वाली नदियाँ चंबल, सिंध, बेतवा तथा केन दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की तरफ बहती हैं इस प्रकार वे इस क्षेत्र के ढाल को दर्शाती हैं। मध्य उच्चभूमि पश्चिम में चौड़ी लेकिन पूर्व में संकीर्ण है। इस पठार के पूर्वी विस्तार को स्थानीय रूप से बुंदेलखंड तथा बघेलखंड के नाम से जाना जाता है। इसके और पूर्व के विस्तार को दामोदर नदी द्वारा अपवाहित छोटा नागपुर पठार दर्शाता है। दक्षिण का पठार एक त्रिभुजाकार भूभाग है जो नर्मदा नदी के दक्षिण में स्थित है। उत्तर में इसके चौड़े आधार पर सतपुड़ा की शृंखला है जबकि महादेव की पहाड़ी तथा मैकाल शृंखला इसके पूर्वी विस्तार हैं।

दक्कन का पठार

दक्कन का पठार जिसे विशाल प्रायद्वीपीय पठार के नाम से भी जाना जाता है, भारत का विशालतम पठार है, यह पठार त्रिभुजाकार है, जिसके पठार का एक भाग उत्तर-पूर्व में भी देखा जाता है जिसे स्थानीय रूप से ‘मेघालय या शिलांग का पठार’ तथा ‘उत्तर कचार पहाड़ी’ के नाम से जाना जाता है। यह एक भ्रंश के द्वारा छोटा नागपुर पठार से अलग हो गया है। पश्चिम से पूर्व की ओर तीन महत्त्वपूर्ण शृंखलाएँ गारो खासी तथा जयंतिया हैं दक्षिण (दक्कन) के पठार के पूर्वी एवं पश्चिमी सिरे पर क्रमशः पूर्वी तथा पश्चिमी घाट स्थित हैं। पश्चिमी घाटए पश्चिमी तट के समानांतर स्थित है। वे सतत् हैं तथा उन्हें केवल दर्रों के द्वारा ही पार किया जा सकता है।
पश्चिमी घाटए पूर्वी घाट की अपेक्षा ऊंचे हैं।

प्रायद्वीपीय पठार की एक विशेषता यहाँ पायी जाने वाली काली मृदा है, जिसे ” दक्कन ट्रैप ” के नाम से भी जाना जाता है। इसकी उत्पत्ति ज्वालामुखी से हुई है इसलिए इसके शैल आग्नेय ( Igneous Shell) हैं। वास्तव में इन शैलों का समय के साथ अपरदन हुआ है जिनसे काली मृदा का निर्माण हुआ है। अरावली की पहाड़ियाँ प्रायद्वीपीय पठार के पश्चिमी एवं उत्तर-पश्चिमी किनारे पर स्थित है। ये बहुत अधिक अपरदित एवं खंडित पहाड़ियाँ हैं। ये गुजरात से लेकर दिल्ली तक दक्षिण-पश्चिम एवं उत्तर-पूर्व दिशा में विस्तृत हैं।

अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमे फेसबुक(Facebook) पर ज्वाइन करे Click Now

भारत के प्रमुख पठार Major Plateau of India

error: Content is protected !!