काश कोई ऐसा होता


काश कोई ऐसा होता

काश मेरी जिंदगी में भी कोई ऐसा होता
जहाँ दिल से अपनापन मिलता
जो गले लगा के कहता
अरे ओ पगले रोया मत कर
तेरे रोने से हमें भी तकलीफ होती है
काश मेरी ज़िंदगी में भी कोई ऐसा होता
जो चेहरे की हँसी के पीछे का दर्द समझ पाता
मेरी हर तकलीफ का उसे अहसास होता
गले लगा के कहता परेशान मत हो मैं हूँ न
काश मेरी ज़िंदगी में भी कोई ऐसा होता
जिसके कंधे पे सर रख के जी भर के रो सकता
और अपने दिल के दर्द बयां कर सकता
और वो गले लगा के कहता
सब ठीक हो जाएगा, तू रो मत मैं हूँ न
काश मेरी ज़िंदगी में भी कोई ऐसा होता
मेरे खुशियों में खुश होता
मेरे दुख में दुखी होता
मेरे अहसासों मेरे जज्बातों की पहचान होती
जो मैं रूठ जाता तो मुझे मानता
जहाँ रिस्ते दिल से निभाये जाते दिमाग से नहीं
मुझे गले से लगाता
और कहता पगले रूठा मत कर मेरे से
तू ही मेरी दुनिया है
तेरे बिना कौन है मेरा
काश मेरी ज़िंदगी में भी कोई ऐसा होता
जो मेरी ख्वाहिश को समझता
मेरी खुशियों के खातिर
एक बार तो खुद की खुशियां लुटाता
मुझे गले से लगाता और कहता
बता क्या चाहता है?
और मैं उसे अपनी ……………………
काश मेरी ज़िंदगी मे भी कोई ऐसा होता