भारत में वन के प्रकार

भारत में वन के प्रकार जलवायु की विभिन्न दशाओं और अन्य कारणों से भूमि पर अनेक प्रकार के पेड़-पौधे प्राकृतिक रूप से उग आते हैं – इन्हें वनस्पति कहते हैं. वनस्पति भूमि के ऊपर उगने वाली प्राकृतिक संपत्ति है. भारत में घास के मैदान प्रायः नहीं पाए जाते. वर्षा के दिनों में पहाड़ियों पर और यत्र-तत्र घास अवश्य हो जाती हैं. 2,000 मिलीमीटर  से अधिक वर्षा वाले प्रदेशों में पहाड़ियों पर सदाबहार वन पाए जाते हैं. हिमालय के पूर्वी भाग में, जहाँ वर्षा अधिक होती है, असम की पहाड़ियों पर…

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भारत – भौगोलिक स्थिति और विस्तार

भारत – भौगोलिक स्थिति और विस्तार भौगोलिक दृष्टि से भारत का मुख्य भूभाग 8°4′ से लेकर 37°6′ उत्तर अक्षांश के बीच है और 68°7′ पूर्व देशांतर से 97°25′ पूर्व देशांतर के मध्य फैला है. भारत का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग किमी. है. कर्करेखा इस देश को दो सामान भागों में बाँट देती है. 2004 के पूर्व इसका सबसे दक्षिणी छोर इंदिरा पॉइंट के नाम से जाना जाता था. यह 2004 की सुनामी लहरों में जलमग्न हो गया. देश का अक्षांशीय और देशान्तारीय विस्तार लगभग 30° है. देशंतारीय विस्तार का प्रभाव भी…

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भारत में वर्षा का वितरण और दक्षिण-पश्चिमी मानसून

भारत में वर्षा का वितरण और दक्षिण-पश्चिमी मानसून मध्य जून (आषाढ़) से मौसम एकाएक बदलने लगता है. आकाश बादलों से घिरने लगता है और दक्षिण-पश्चिमी पवन चलने लगते हैं. ये पवन “दक्षिण-पश्चिमी मानसून” के नाम से प्रसिद्ध हैं क्योंकि मूलतः ये दक्षिण-पश्चिम से शुरू होते हैं. इस मानसून के आते ही तापक्रम में काफी गिरावट आ जाती है, अर्थात् तापक्रम घटने लगता है. मगर वायु में नामी बढ़ जाती है जिससे असह्य ऊमस का अनुभव होता है और बेचैनी असह्य हो उठती है. उस समय यहाँ की हालत विषुवत-रेखीय प्रदेश…

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भारत की प्रमुख नदियाँ और उनके उद्गम स्थल

भारत की प्रमुख नदियाँ और उनके उद्गम स्थल भारत की नदियों (Rivers of India) को चार समूहों में वर्गीकृत किया जा सकता है – 1) हिमालय की नदियाँ 2) प्रायद्वीपीय नदियाँ 3) तटीय नदियाँ 4) अन्तःस्थलीय प्रवाह क्षेत्र की नदियाँ. आज हम भारत की प्रमुख नदियों के विषय में बात करेंगे और वे कहाँ से निकलती (origin) हैं, उनकी सहायक नदी (Tributary river) कौन हैं और ये कहाँ जाकर गिरती हैं, इसकी भी चर्चा करेंगे. RIVERS OF INDIA, ORIGIN AND TRIBUTARY RIVERS सिन्धु नदी इसका उद्गम तिब्बती क्षेत्र में कैलाश…

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भारत का जल संसाधन (Water Resources of India)

भारत का जल संसाधन (Water Resources of India) जल एक अमूल्य प्राकृतिक संसाधन है जो सम्पूर्ण पारिस्थितिक तन्त्र के लिए ही महत्त्वपूर्ण है, पर मानव के लिए इसके विशेष महत्त्व हैं क्योंकि पेय जल, सिंचाई, उद्योग, घरेलू कार्य, ऊर्जा सभी के लिए जल होना जरुरी है. भारत का वार्षिक जल बजट प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त कुल जल – 4000 अरब घन मीटर वाष्पन से लुप्त होने वाला जल – 700 अरब घन मीटर जमीन द्वारा सोखा जाने वाला जल – 700 अरब घन मीटर बहकर समुद्र में चला जाने वाला जल –…

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माल्थस का जनसंख्या सिद्धांत

माल्थस का जनसंख्या सिद्धांत जनसंख्या का अध्ययन कुछ निश्चित सिद्धांतों पर आधारित है. जनसंख्या तथा संसाधन के बीच सम्बन्ध स्थापित करने के लिए सिद्धांत प्लेटो के समय से प्रतिपादित होते आये हैं. परन्तु 18वीं शताब्दी के समय तथा 19वीं शताब्दी में कई सिद्धांत प्रतिपादित किये गए. इन सभी सिद्धांतों को प्राकृतिक तथा सामजिक सिद्धांतों के वर्गों में बांटा जाता है. प्राकृतिक सिद्धांतों में सबसे महत्त्वपूर्ण माल्थस, माइकल थॉमस सैडलर, थॉमस डबलडे, हरबर्ट स्पेंसर, पर्ल, द कैस्ट्रो आदि सिद्धांत प्रमुख हैं. सामजिक-सांस्कृतिक सिद्धांतों में हैनरी जॉर्ज, आर्सेन ड्यूमाउन्ट, डेविड रिकार्डो तथा कार्ल…

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वायुमंडल का संगठन और उसकी संरचना

वायुमंडल का संगठन और उसकी संरचना से तो हमने स्कूल की किताबों (NCERT, NIOS, other board textbooks) में वायुमंडल (atmosphere) के बारे में कई बार पढ़ा है मगर आज भी competitive exams में वायुमंडल से सम्बंधित ऐसे टेढ़े-टेढ़े सवाल पूछे जाते हैं जिन्हें हल करने में हमारे पसीने छूट जाते हैं. आज मैं वायुमंडल क्या है, उसकी रचना, संगठन/संघटन, उसकी रासायनिक संरचना (chemical composition), प्रमुख गैसें (gases), उसकी परतों (layers) से सम्बंधित उन्हीं तथ्यों को आपके सामने Hindi भाषा में रखूँगा जो आपके काम आ सके. ATMOSPHERE IN HINDI – वायुमंडल…

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मानव विकास सूचकांक क्या होता है

मानव विकास सूचकांक क्या होता है मानव विकास को मानव विकास सूचकांक (Human Development Index, HDI) के रूप में मापा जाता है. इसे मानव विकास की आधारभूत उपलब्धियों पर निर्धारित एक साधारण समिश्र सूचक (composite indicator) के रूप में मापा जाता है और विभिन्न देशों द्वारा स्वास्थ्य, शिक्षा तथा संसाधनों तक पहुँच  के क्षेत्र में की गई उन्नति के आधार पर उन्हें श्रेणी (rank) प्रदान करता है. यह श्रेणी 0 से 1 के बीच के स्कोर पर आधारित होता है, जो एक देश, मानव विकास के महत्त्वपूर्ण सूचकों में अपने रिकॉर्ड से प्राप्त…

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चन्द्र ग्रहण कैसे होता है

चन्द्र ग्रहण कैसे होता है साधारणतः पूर्णिमा की रात को चंद्रमा पूर्णतः गोलाकार दिखाई पड़ना चाहिए, किन्तु कभी-कभी अपवादस्वरूप चंद्रमा के पूर्ण बिम्ब पर धनुष या हँसिया के आकार की काली परछाई दिखाई देने लगती है. कभी-कभी यह छाया चाँद को पूर्ण रूप से ढँक लेती है. पहली स्थिति को चन्द्र अंश ग्रहण या खंड-ग्रहण (partial lunar eclipse) कहते हैं और दूसरी स्थिति को चन्द्र पूर्ण ग्रहण या खग्रास (total lunar eclipse) कहते हैं. चंद्र ग्रहण कब लगता है? चंद्रमा सूर्य से प्रकाश प्राप्त करता है. उपग्रह होने के नाते चंद्रमा अपने अंडाकार कक्ष-तल…

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भौतिक भूगोल : महत्वपूर्ण शब्दावली और तथ्य

भौतिक भूगोल : महत्वपूर्ण शब्दावली और तथ्य भूगोल से सम्बंधित शब्दावली उपसौर और अपसौर पृथ्वी की परिक्रमा की दिशा पश्चिम से पूर्व है, जिस कक्षा में सूर्य पृथ्वी की परिक्रमा करती है, वह दीर्घवृत्तीय है. अतः 3 जनवरी को सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी न्यूनतम (9.15 करोड़ मील) हो जाती है, जिसे उपसोर (Perihelion) कहते हैं. इसके विपरीत 4 जुलाई को पृथ्वी की सूर्य से अधिकतम दूरी (9.15 करोड़ मील) होती है, जिसे अपसोर स्थिति (Aphelin) कहते हैं. एपसाइड रेखा अपसौरिक एवं उपसौरिक को मिलाने वाली काल्पनिक रेखा…

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ज्वार-भाटा क्या है और कैसे उत्पन्न होता है Types of Tides

ज्वार-भाटा क्या है और कैसे उत्पन्न होता है? Types of Tides ज्वार-भाटा (tide) वे तरंग हैं…In fact वे सागरीय तरंगे हैं, जो पृथ्वी, चाँद और सूर्य के आपस के आकर्षण से उत्पन्न होते हैं. जब समुद्री जल ऊपर आती है तो उसे “ज्वार” और जब नीचे आती है तो “भाटा” कहते हैं. चंद्रमा के आकर्षण शक्ति का पृथ्वी के सागरीय जल पर सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है. ज्वार-भाटा चंद्रमा और सूर्य के पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा खिंचाव के कारण उत्पन्न होता है. ज्वार भाटा से सम्बंधित रोचक तथ्य चंद्रमा सूर्य से…

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