प्रेमिका का खत प्रेमी के नाम

प्रेमिका का खत प्रेमी के नाम

जो सत्य है अव्यक्त है, मिलन की झूठी आस है,
नहीं बनोगे हमसफर, यह सोच दिल‌ उदास है।
कुरीतियों की बेडिया, समाज में बडी बडी,
कदम लडखडा रहे, मुश्किलें गले पडी ।
तुम जीत नहीं पाओगे, समाज के दरिंदों से,
ये झूठी शान के लिए, पर काटते परिदों के।
उन्मुक्त गगन मे यहां, उडान का विरोध है
जाति-पाति धर्म का, हर कदम यहां अवरोध है।
जब रूप रंग वर्ण में, हम सभी यहां समान हैं
फिर उच्च निम्न कुल का,कैसा मिथ्या अभिमान है।

लेकिन यह बात सितमगर जमाना नहीं समझता। प्यार हमेशा कुर्बानी मांगता है चाहे प्यार की दी जाये या प्रेमी की। हम अपनें प्रेम को कुर्बान कर देंगें लेकिन तुमको कुर्बान नहीं होनें देंगे। मैं तुमसे फिर कहती हूं कि तुम मुझे भूल जाओ, मेरे लिए दुनिया से मत लडो, मैं तुम्हारी नहीं हो सकती, मेरी जिन्दगी से चले जाओ, चले जाओ, चले जाओ….. क्योंकि

झूठी शान, इज्जत की दुहाई,
जज्बातो पर देकर चोट
लोग उजाडेगें दुनिया अपनीं
लेकर कुल की मर्यादा की ओट।
यह प्यार हमारा मिट जायेगा,
सांसों की डोर टूट जायेगी
मैं तन्हा, बेबस हो जाऊंगी,
जीनें की आस छूट जायेगी।
पत्थर का बुत कह सकते हो तुम
हमको कोई गिला नहीं है
दुनिया में महफूज रहो तुम,
प्यार का केवल शिला यही है।
तुमसे है अब अरदास यही
जालिम दुनिया से मत लडना,
नवजीवन आरम्भ करो तुम
अब प्यार किसी से मत करना
अब प्यार किसी से मत करना।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

error: Content is protected !!