घातक जीन : प्रभावी और अप्रभावी घातक जीन

घातक जीन : प्रभावी और अप्रभावी घातक जीन

परिभाषा :-  कुछ जीनों के प्रभाव के कारण जीव की मृत्यु हो सकती है। युग्म विकल्पी या अलील (Allele) जिनके कुछ जीनोटाइप के कारण जीव की मृत्यु हो सकती है, उन्हें घातक जीन (Lethal Gene) कहा जाता है। घातक जीन को कुनोट (Cuenot) ने खोजा था।

घातक जीन के प्रभाव के भ्रूणीय अवस्था में ही जीव की मृत्यु हो जाती है।  उदाहरण चूहों में पीला फर। अथवा यौन परिपक्वता से पहले ही  व्यक्ति मर जाता है। जैसे दात्र कोशिका अरक्तता। (सिकल सेल एनीमिया)  घातक जीन के कारण मकई में Albinism उत्पन्न होता है।

घातक जीन प्रभावी या अप्रभावी हो सकती है।

(A) प्रभावी घातक जीन:-

यह जीन विषमयुग्मजी (Homozygous) अवस्था में अपना घातक प्रभाव दर्शाती है। उदाहरण: मानव में Epiloia प्रभावी घातक जीन के लिए एक उदाहरण है। यदि घातक जीन प्रभावी होती है, तो घातक अलील युक्त सभी व्यक्ति मर जाते हैं और जीन अगली पीढ़ी को प्रेषित नहीं किया जा सकता है।

(B) अप्रभावी घातक जीन:-

इस प्रकार की जीन केवल समयुग्मजी (Homozygous) अवस्था में ही अपना प्रभाव दर्शाती है। इसके कारण फीनोटाइपिक अनुपात हमेशा 3: 1 से 2: 1 परिवर्तित होता है।
उदाहरण: चुहों में पीला फर

चुहों में घातक जीन

घातक पीले अलील, चूहों में एक सहज उत्परिवर्तन होता है। जो कि उनके फर को पीला बनाता है।
यह एलील 20 वीं शताब्दी के आसपास फ्रांसीसी आनुवंशिकीविद् ल्यूसीन कुनोट (Lucien Cuenót) ने खोजा था, जिन्होंने पाया कि घातक पीले अलील एक असामान्य पैटर्न में वंशागत होता है।

जब पीले चूहों (Yy) का सामान्य भूरे चूहों (yy) के साथ संकरण (Cross) कराया गया, तो उन्होंने आधे पीले (Yy) और आधे भूरे (yy) संतति का उत्पादन किया। जिससे यह पता चला कि पीले चूहें विषमयुग्मजी (Heterozygous) थे, और पीले अलील Y भूरे अलील y पर प्रभावशाली (Dominant) थे।

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घातक जीन : प्रभावी और अप्रभावी घातक जीन

लेकिन जब दो पीले चूहों का एक दूसरे के साथ संकरण करवाया गया, तो वे 2:1 के अनुपात में पीले (Yy) और भूरे रंग (yy) की संतति उत्पन्न करते थे।

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घातक जीन : प्रभावी और अप्रभावी घातक जीन

ऐसा इसलिए होता है। क्योंकि Y अलील अप्रभावी घातक जीन है। जो विषमयुग्मजी (Heterozygous) Yy स्थिति में अपना घातक प्रभाव व्यक्त नहीं करती। लेकिन समयुग्मजी (Homozygous) YY स्थिति में अपना घातक प्रभाव व्यक्त करती है जिससे भ्रूणीय अवस्था में ही चूहों की मृत्यु हो जाती है।

अतः किसी जीन के समयुग्मजी स्थिति में अपना प्रभाव व्यक्त जीव की मृत्यु हो जाती तो वह जीन अप्रभावी घातक जीन कहलाती है।

ध्यान रहे के यहा Y अलील रंग उत्पन्न करने की दृष्टि से तो प्रभावी है। लेकिन घातक होने की दृष्टि से अप्रभावी है।

उदहारण

मानव में घातक जीन के उदाहरण –

  • Congenital ichthyosis
  • Sickle cell anemia
  • Thalassemia
  • Retinoblastoma
  • Epilopia
  • Huntington’s chorea

Biology Notes In Hindi

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