जन्तु विज्ञान की शाखाएँ (Branches of Zoology) एनाटोमी – शरीर एवं विविध अंगो की विच्छेदन द्वारा प्रदर्शित सकल रचना एंथ्रोपोलॉजी – मानव जाति के सांस्कृतिक विकास का अध्ययन एंजिओलॉजी – परिसंचरण तंत्र का अध्ययन एयरोबॉयोलॉजी – उड़ने वाले जंतुओं का अध्ययन एरेकनोलॉजी – मकड़ियों का अध्ययन बायोमेट्रिक्स – जीव विज्ञान के प्रयोगों के विभिन्न परिणामों का सांख्यिकी विश्लेषण […]
Biology
कोशिकांग, उनके खोजकर्ता एवं कार्य कोशिकांग खोजकर्ता कार्य हरित लवक हेकल प्रकाश-संश्लेषण द्वारा भोजन का निर्माण. माइटोकॉन्ड्रिया काॅलीकर कोशिकीय श्वसन द्वारा ATP का निर्माण किसके द्वारा कोशिका में ऊर्जा का संश्लेषण होता है. अतः इसे कोशिका का पावर प्लांट कहते हैं. अंतः प्रद्रव्यी जालिका पोर्टर प्रोटीन संश्लेषण(RER में) एवं लिपिड, […]
परागण पौधों में पराग कण (Pollen grains) का नर-भाग (परागकोष – Anther) से मादा-भाग (वर्तिकाग्र – Stigma) पर स्थानातरण परागण (Pollination) कहलाता है। परागन के उपरान्त निषेचन की क्रिया होती है और प्रजनन का कार्य आगे बढ़ता है। परागण क्या है? जब किसी पुष्प का परागकण निकालकर किसी दूसरे पुष्प या फिर किसी दूसरे पौधे के पुष्प तक […]
परागण एवं इसके प्रकार परागण (pollination) पादपों में युग्मक स्थानान्तरण (gamete transfer) यह प्रक्रिया परागण द्वारा होती है। परागकोष के स्फूटन के पश्चात परागणकणों का स्त्रीकेसर के वतिकाग्र तक जाना परागण कहलाता है। परागकण के स्रोत के आधार पर (depending on the source of pollen) परागण निम्न प्रकार का होता है। […]
जीवविज्ञान में बीजाणु (spore) लैंगिक व अलैंगिक प्रजनन की एक संरचना है जिसे कोई जीव या जीव जाति स्वयं को फैलाने (प्रकीर्णन करने) या विषम परिस्थितियों में दीर्घकाल तक जीवित रहने के लिये बनाती है। बीजाणु बहुत से पौधों, शैवाल (ऐल्गी), कवक (फ़ंगस) और प्रोटोज़ोआ के जीवनचक्र का महत्वपूर्ण भाग होता है। बैक्टीरिया (जीवाणु) के भी बीजाणु बनते हैं, जो अंतर्बीजाणु (endospore) कहलाते हैं, जो किसी प्रजनन चक्र का भाग नहीं होते, बल्कि कठिन परिस्थितिओं में […]
पराग स्त्रीकेसर संकर्षण परागकण की पहचान जब परागकण परागण के द्वारा वतिकाग्र पर पहुँच जाते है। तो परागकण व वतिकाग्र के रासायनिक घटकों के मध्य परस्पर क्रिया द्वारा यह सुनिश्चित किया जाता है, कि वतिकाग्र पर पहुँचने वाला परागकण ठीक उसी जाती का है। क्योंकि परागण के द्वारा गलत प्रकार के परागकण (दूसरी पादप […]