कर्नाला क़िला

कर्नाला क़िला

कर्नाला क़िला महाराष्ट्र में रायगढ़ ज़िले के कर्नाला शहर का आकर्षण और प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थान है। फन्नेल हिल के नाम से भी प्रसिद्ध यह क़िला ‘कर्नाला पक्षी अभयारण्य’ के अंतर्गत आता है और दो क़िलों से मिलकर बना है, जिसमें एक क़िला दूसरे से ऊंचा है। ऊँचे क़िले में 125 फुट ऊंचा स्तंभ है, जो बेसाल्ट से बना हुआ है और ‘पांडु स्तंभ’ के नाम से जाना जाता है। आसपास की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।



इतिहास

क़िले के निर्माण की तिथि के बारे में इतिहासकारों में मतभेद देखा गया है, परन्तु इस क़िले को 1200 ई. से पहले का माना जाता है। 1248 ई. से 1318 ई. तक यह क़िला देवगिरि के यादव वंश और 1318 ई. से 1347 ई. तक तुग़लक़ वंश के अधिपत्य में था। कर्नालाउत्तरी कोंकण ज़िलों की राजधानी हुआ करता था। बाद में यह क़िला गुजरात के शासनकर्ताओं के अधिकार में आ गया, जिसे 1540 ई. में अहमदनगर के निज़ाम शाह ने जीत लिया। बाद में बसई के पुर्तग़ाली शासकों ने इसे जीत लिया और गुजरात की सल्तनत को दे दिया।

छत्रपति शिवाजी ने 1670 ई. में इसे पुर्तग़ालियों से छीन लिया और उनकी मृत्यु के बाद 1680 ई. में यह क़िला मुग़ल शासक औरंगज़ेब के अधिकार में चला गया। 1740 ई. में इसे फिर से पुणे के पेशवा शासकों ने जीता और 1818 ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी ने इसे जीत लिया।

स्थिति

कर्नाला क़िला मुंबई के बहुत नजदीक रायगढ़ ज़िले में एक पहाड़ी के उपर बना हुआ है। इस पहाड़ी का चिमनी जैसा शिखर मुंबई-पुणे और मुंबई-