ओम का नियम सत्यापन प्रैक्टिकल

ओम का नियम सत्यापन प्रैक्टिकल

सत्यापन | सीमायें | धारा-विभवांतर ग्राफ

परिभाषा –

“समान ताप व स्थिति में किसी बन्द डीसी परिपथ में प्रतिरोध के सिरों पर लगने वाला वोल्टेज उस प्रतिरोध में प्रवाहित होने वाली धारा के मान के समानुपाती होता है ।”

अर्थात्
V∝ I
सरल भाषा – किसी बंद डीसी परिपथ में वोल्टेज का मान उस परिपथ में प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा और प्रतिरोध के मान के गुणनफल के बराबर होता है । यहां बंद डीसी परिपथ (Close DC Circuit) यानी की ऐसा डीसी सर्किट जिसमें स्विच ऑन हो और परिपथ चालू हो ।
इसमें :- वोल्टेज (V) = धारा (I) × प्रतिरोध (R)
इसी फार्मूले का उपयोग करके आप वोल्टेज, धारा और प्रतिरोध के मान निकाल सकते हैं ।
जैसे
V = IR
R = V/I
I = V/R
ओम का नियम क्या है परिभाषा:- धारा और विभवांतर के बीच ग्राफ इस नियम की सीमाएं और practical ओम केे नियम का सूूत्र इस पेज पर है Voltage और Current I में सम्बन्ध और इसके अनुप्रयोग और ओम का मात्रक इस नियम का नाम जर्मन वैज्ञानिक जार्ज साइमन ओम के नाम पर रख क्युकी  1828 में इन्होने ही Voltage यानि विभवान्तर और Current के बीच सम्बन्ध का अपने प्रयोगों से पता लगाया जिसे ओम का नियम नाम दिया गया |
ओम का नियम
ओम का नियम
यदि किसी चालक यानि Conductor की भौतिक परिस्थितियों यानि लम्बाई,ताप,दाब,अदि में कोई परिवर्तन नहीं किया जाये तब उस चालक के सिरों पर उत्पन्न विभवान्तर उसमे Flow हो रही धारा के समानुपाती होता है
यदि लगाया गया विभवान्तर V मान लेते है और बहने वाली धारा I मान लेते है तब ओम के नियम से दोनों में सम्बन्ध-

V ∝ I

V=RI

यहाँ पर R एक Constant है जिसे Resistance यानि प्रतिरोध कहते है इस  Ω से दर्शाते है
R=V/I
वोल्टेज या विभवांतर v का मान बढ़ाने पर धारा का मान भी बढ़ता है

ओम के नियम के उपयोग (Uses of ohm’s law in Hindi)

यह सिद्धांत सरल सर्किट्स को सुलझाने में अत्यंत उपयोगी है। पूर्ण सर्किट वह होता जो एक बंद लूप बनाता है। यदि सर्किट में कोई वोल्टेज स्रोत है और कोई ऐसा अंग जो करंट का उपभोग करे, तो उस लूप के सभी वोल्टेज का कुल शून्य ( 0 ) होगा।

विभवान्तर और धारा के बीच ग्राफ

विभवान्तर और धारा के बीच ग्राफ
विभवान्तर और धारा के बीच ग्राफ

यदि चालक के विभवान्तर और धारा के बीच ग्राफ खीचे तो एक सरल रेखा प्राप्त होती है जो बताती है की विभवान्तर के बड़ने पर धारा भी बड़ेगी और विभवान्तर के कम होने पर धारा भी कम होगी |

ओम के नियम का सत्यापन (verification of ohm’s law in Hindi)

इस सिद्धांत से यह पता चलता है कि किसी कंडक्टर का रेजिस्टेंस स्थिर (कांस्टेंट) रहता है। यानी यदि वोल्टेज को दुगुना कर दिया जाए, तो कंडक्टर से करंट भी दुगुना हो जाएगा। परंतु रेजिस्टेंस वही रहेगा।

ध्यान रहे कि यह सारी बातें तभी तक वैध हैं, जब तक कंडक्टर का तापमान स्थिर है। यदि तापमान बढ़ा, तो रेजिस्टेंस भी बढ़ जाएगा।

Ohm का नियम सत्यापन प्रैक्टिकल

महत्वपूर्ण सामग्री – बैटरी, परिवर्ती प्रतिरोध (Rheostat), वोल्टमीटर, अमीटर, ज्ञात स्थिर प्रतिरोध, तार , स्विच, प्लायर, पेंचकस, पेन और कागज ( गणना हेतु )
विधि – नीचे दिए चित्र के अनुसार कनेक्शन करते हैं ।
Ohm का नियम सत्यापन प्रैक्टिकल
Ohm का नियम सत्यापन प्रैक्टिकल
● वोल्टमीटर को स्थिर प्रतिरोध के समान्तर में और अमीटर को श्रेणी में संयोजित करते हैं ।
● स्विच ऑन करते हैं जिससे परिपथ में वैद्युतधारा प्रवाहित होने लगती है ।
● अब अमीटर और वोल्टमीटर की रीडिंग नोट करते हैं ।
● रीडिंग में प्राप्त हुए मानों को ओम के नियम के सूत्र V = IR में रखकर सत्यापित करते हैं ।
जहाँ,
V = वोल्टेज
I = धारा
R = प्रतिरोध
● परिवर्ती प्रतिरोध को आगे या पीछे बढ़ाकर पुनः रीडिंग नोट करके उसे पुनः सत्यापित करते हैं । अगर आपके द्वारा ज्ञात की गयी रीडिंग सही है तो परिपथ में
V = IR 
I = V/R
R = V/I
Example – माना कि परिपथ में 6 वोल्ट और 2 एम्पियर की धारा प्रवाहित हो रही है और प्रतिरोध का मान 3 ओह्म है ।
तब
V = IR 
6 = 2×3
6 = 6
अतः ओम का नियम सत्यापित हुआ ।

ओम के नियम की Limit यानि सीमायें

  • ओम का नियम Metal Conductor के लिए ही apply होता है
  • ताप और अन्य भौतिक परिस्थतियों Constant रहे यानि कोई परिवर्तन न हो
  • और इनके कारण चालक में Strain यानि विकृति पैदा न हो

ओम के नियम पर प्रयोग या सत्यापन

ओम के नियम का सत्यापन या हम कह सकते है प्रयोग इसके पहले तो आप कुछ महत्वपूर्ण बातें जान लें

वास्तव में विभवांतर क्या होता है -जब किसी wire में धारा वह रही होती है तो जिस प्रेसर से वह रही होती है उसे विभवांतर या voltage कहते है इसके लिए detail में हमने water analogy से इसे अच्छे से समझाया है |

अब प्रतिरोध क्या है इसका साधारण सा जबाब है धारा के मार्ग में रुकावट ही प्रतिरोध है यह रुकावट कुछ भी हो जैसे तार की लंबाई बड़ा दी जाए तो प्रतिरोध बढ़ जाएगा तो यह प्रतिरोध हो गया |

आपको ओम के नियम के सत्यापन के लिए सबसे पहले आपको एक सर्किट board जैसे breadboard लेना है और एक resistance यानी प्रतिरोध जो बाजार में बहुत सस्ते मिल जाते है आपको एक कोई भी लेना है और उसे ब्रेडबोर्ड पर लगाना है एवं उस प्रतिरोध का मान ज्ञात करने के लिए रेसिस्टर कलर कोड के उपयोग से करें |

ओम के नियम पर प्रयोग या सत्यापन
ओम के नियम पर प्रयोग या सत्यापन

मान लीजिये की आपके द्वारा उपयोग किया गया प्रतिरोध 1k ओम का है | अब आपको किसी variable दिष्ट धारा का स्त्रोत लेना है जिससे आप अपने सर्किट को 1वोल्ट से लेकर 10 वोल्ट तक वोल्टेज दे सकें जैसे कि एक adapter जिसमे वोल्टेज regulator लगा हो और एक स्क्रीन जिसमे वोल्टेज दिखता रहे कि हम कितना वोल्टेज अपने सर्किट को दे रहे है |

हम जानते है कि श्रेणी क्रम में धारा समान रहती है इसलिए हम एक अमीटर अपने सर्किट में प्रतिरोध के श्रेणी क्रम में लगते है अमीटर धारा मापने के यन्त्र होता है |

वाल्टमीटर या विभवमापी

और हम ये भी जानते है कि विभवांतर समांतर क्रम में समान रहता है| इस लिए एक वाल्टमीटर या विभवमापी हम उसी प्रतिरोध के साथ समांतर क्रम में जोड़ेंगे विभवमापी विभवांतर मापता है ये सब आपको पता होनी चाहिए |

आप मल्टीमीटर का उपयोग कर सकते है जो धारा और विभवांतर दोनों माप सकता है |

मल्टीमीटर

हमारा पूरा परिपथ बन चुका है अब ओम के नियम को ध्यान में रखते हम एक सारणी बनाएंगे सबसे पहले दिष्ट धारा के source में लगे रेगुलेटर को 1v से 10v तक ले जाते है और सभी उपकरणों में reading note करते चलते है

यदि आप 1k ओम का प्रतिरोध उपयोग कर रहे है तब आप voltage को 0v से 1v करें फिर अमीटर में देखें आपको 1mA दिखेगा यानी 1 मिली एम्पीयर

अब फिर 1v से 2v पर set करें तब आप अमीटर में 2mA देखोगे फिर 3v रखें तो आप 2.99mA धारा दिखेगी

इसी प्रकार आप 10v तक कि reading नोट करें यही ओम के नियम का सत्यापन है आप प्रतिरोध अलग अलग उपयोग करके देखिए सभी के रिजल्ट अलग अलग आते है और ओम का नियम इन पर लागू होता है |

ओम का नियम सत्यापन प्रैक्टिकल

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